Dharmendra Deol passes away: बॉलीवुड और देश ने खोया अपना ‘He-Man’, फैंस ने नम आंखों से दी विदाई

Dharmendra Deol passes away: बॉलीवुड और देश ने खोया अपना ‘He-Man’, फैंस ने नम आंखों से दी विदाई

धर्मेंद्र नहीं रहे: ‘ही-मैन’ के जाने से खाली हुआ एक पूरा दौर

हिंदुस्तानी सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे प्यारे सितारों में से एक, धर्मेंद्र देओल ने 89 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। सोमवार सुबह मुंबई स्थित उनके घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली, कुछ ही दिनों बाद वे अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले थे। कुछ समय से वे बीमार चल रहे थे, अस्पताल में भर्ती रहे और फिर घर लौटकर रिकवरी कर रहे थे, लेकिन 24 नवंबर की सुबह ने यह दुखद खबर दे दी कि अब ‘ही-मैन’ सिर्फ फिल्मों और यादों में ही रह जाएगा।

उनके जाने की खबर के साथ ही सोशल मीडिया, न्यूज़ चैनल और पूरी फिल्म इंडस्ट्री शोक संदेशों से भर गई। जिन लोगों ने उन्हें बड़े पर्दे पर रोमांस करते, एक्शन करते, हंसाते और रोते देखा है, उनके लिए यह सिर्फ एक अभिनेता की मौत नहीं, बल्कि अपनी यादों के एक हिस्से को खो देने जैसा है।

अस्पताल से घर और फिर अंतिम यात्रा तक की कहानी

पिछले कुछ हफ्तों से धर्मेंद्र की तबीयत ठीक नहीं चल रही थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ और अन्य हेल्थ इश्यू की वजह से मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे करीब 10 दिन तक रहे। बीच में उनकी सेहत को लेकर कई तरह की अफवाहें भी उड़ीं, जिस पर परिवार और डॉक्टरों को सफाई देनी पड़ी कि वे डिस्चार्ज होकर घर पर रिकवर कर रहे हैं।

लेकिन 24 नवंबर की सुबह उनके घर के बाहर पहुंची एम्बुलेंस और सुरक्षा इंतज़ाम की तस्वीरें सामने आईं और जल्द ही यह कन्फर्म हो गया कि धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। इसके कुछ घंटे बाद ही मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां परिवार के साथ‑साथ इंडस्ट्री के दिग्गज सितारे भी नम आंखों से विदाई देने पहुंचे।

पवन हंस श्मशान घाट पर सितारों का मेला, लेकिन माहौल गमगीन

धर्मेंद्र के अंतिम संस्कार में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान, अक्षय कुमार, अजय देवगन जैसे तमाम सुपरस्टार्स पहुंचे। साउथ से रजनीकांत, कमल हासन, चिरंजीवी और मोहनलाल ने भी श्रद्धांजलि दी, कई ने खुद आकर, तो कई ने सोशल मीडिया पर दिल छू लेने वाले मैसेज लिखकर अपना दुख जताया।

घर से निकली शवयात्रा के दौरान उनके बेटे सनी देओल और बॉबी देओल पूरी तरह टूटे हुए दिखे। हेमा मालिनी और उनकी बेटियां भी भावुक नज़र आईं। पवन हंस पर अंतिम संस्कार के वक्त हर किसी के चेहरे पर एक ही बात साफ दिख रही थी – इंडस्ट्री ने सिर्फ एक स्टार नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान को खोया है जो अपने भीतर से बेहद साफ, सादगीभरा और प्यार करने वाला था।

देशभर से आया प्यार: ‘सबसे हैंडसम हीरो’ के लिए भावुक श्रद्धांजलि

सोशल मीडिया पर #Dharmendra, #HeManOfBollywood और #Veeru जैसे हैशटैग पूरे दिन ट्रेंड करते रहे। हर उम्र के फैंस ने अपनी फेवरेट फिल्म, डायलॉग या पोस्टर शेयर करते हुए लिखा कि वे धर्मेंद्र को कैसे हमेशा याद रखेंगे – किसी ने ‘शोले’ के वीरु को याद किया, किसी ने ‘सीता और गीता’ का कॉमेडी अवतार, किसी ने ‘अनुपमा’ और ‘सत्यकम’ वाले संवेदनशील रोल।

प्रधानमंत्री, कई मुख्यमंत्रियों, सांसदों और नेताओं ने भी आधिकारिक बयान जारी कर शोक जताया और कहा कि धर्मेंद्र के जाने से एक युग का अंत हो गया है। उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि पंजाब की मिट्टी से उठे उस संघर्षशील नौजवान के रूप में भी याद किया गया, जिसने बिना गॉडफादर के अपने दम पर इंडस्ट्री में जगह बनाई।

“ही-मैन” कैसे बने धर्मेंद्र?

धर्मेंद्र का कद, शरीर और स्क्रीन प्रेज़ेंस ऐसा था कि 60–70 के दशक में उन्हें देखते ही लोगों के मुंह से निकल जाता – ये तो असली हीरो हैं। जब एक तरफ रोमांटिक हीरो की इमेज चल रही थी, तब धर्मेंद्र ने एक्शन, रोमांस और कॉमेडी – तीनों को मिलाकर एक अलग ही शैली बना दी। उनकी मुस्कान, आंखों की नरमी और डायलॉग डिलीवरी उन्हें बाकियों से अलग करती थी।

‘शोले’ के वीरू के तौर पर पानी टंकी पर चढ़कर शादी की मांग हो या ‘धरम वीर’, ‘यादों की बारात’, ‘चुपके-चुपके’, ‘सत्ते पे सत्ता’, ‘शालीमार’ जैसी फिल्मों में अलग‑अलग अंदाज़ – हर रोल में उन्होंने वह charm दिखाया जो आज भी टीवी पर repeat telecast के वक्त नजर आता है।

300 से ज्यादा फिल्में, 60 साल से लंबा करियर

पंजाब के सरदूलगढ़ के पास एक छोटे से कस्बे से निकलकर मुंबई पहुंचने वाले धर्मेंद्र ने 1960 के दशक में फिल्मों में कदम रखा और देखते ही देखते इंडस्ट्री के सबसे बिज़ी और सबसे पसंद किए जाने वाले सितारे बन गए। उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया – क्लासिक रोमांटिक ड्रामा से लेकर मसाला एक्शन और हार्ट‑टचिंग फैमिली फिल्मों तक।

उनके करियर की लंबाई और निरंतरता यह दिखाती है कि उन्होंने हर दौर की पसंद के हिसाब से खुद को ढाला – 60s का रोमांटिक हीरो, 70s–80s का एक्शन स्टार, 90s का परिवार के मुखिया वाला रोल और 2000s के बाद का इमोशनल, प्यारा बुजुर्ग किरदार। हर फेज में दर्शकों ने उन्हें उतना ही प्यार दिया।

सिर्फ स्टार नहीं, किसान का बेटा और ज़मीन से जुड़ा इंसान

धर्मेंद्र अक्सर इंटरव्यूज़ में कहते थे कि वे दिल से आज भी गांव के किसान हैं। शूटिंग के बीच जब भी मौका मिला, वे अपने फॉर्महाउस और खेतों में जाते, ट्रैक्टर चलाते, खुद पौधे लगाते और फसलों के बीच समय बिताते। शायद यही वजह थी कि देहात, गांव और छोटे शहरों के दर्शकों के बीच उनकी पकड़ हमेशा बहुत मजबूत रही।

उनकी यही सादगी off-screen भी दिखती थी – बिना स्टारडम के दिखावे के, हर किसी से प्यार से मिलना, set पर जूनियर आर्टिस्ट तक से हंसकर बात करना और नए लोगों को encourage करना। जैकी श्रॉफ सहित कई एक्टर्स ने आज के ट्रिब्यूट में लिखा कि धर्मेंद्र जैसे senior के साथ काम करना अपने आप में acting school जैसा था।

परिवार और विरासत: देओल खानदान की मजबूत नींव

धर्मेंद्र ने पहली पत्नी प्रकाश कौर से सनी और बॉबी देओल सहित चार बच्चों की परवरिश की, बाद में हेमा मालिनी से शादी की और ईशा व अहाना देओल के पिता बने। आज देओल परिवार के कई सदस्य फिल्मों और पॉलिटिक्स दोनों में सक्रिय हैं – सनी देओल सांसद और सुपरस्टार, बॉबी का करियर OTT के दौर में फिर चमका, हेमा मालिनी खुद सांसद और क्लासिक स्टार रहीं।

देओल खानदान की यह पूरी legacy धर्मेंद्र की मेहनत, सोच और संघर्ष की देन है। पंजाब के एक नौजवान से लेकर मुंबई के सुपरस्टार बनने और फिर खुद के बच्चों को भी इंडस्ट्री में जगह दिलाने का सफर आसान नहीं रहा होगा, लेकिन उन्होंने अपनी life में कभी शिकायतों से ज्यादा अपने सुख और प्यार की बातें कीं।

आखिरी फिल्म और अधूरी मुलाकातें

धर्मेंद्र ने हाल के सालों में भी काम करना बंद नहीं किया। ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में उनका दिल छू लेने वाला रोल अभी दर्शकों की याद में ताज़ा था। उनकी आखिरी फिल्म के तौर पर अब सृराम राघवन की war-drama ‘इक्कीस (Ikkis)’ को याद किया जाएगा, जो 1971 युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर बनी है और क्रिसमस 2025 पर रिलीज़ होने वाली है।

कई फैंस को अब यह अहसास हो रहा है कि बड़े पर्दे पर उन्हें आखिरी बार देखने का मौका शायद वही फिल्म होगी। थिएटर में उनकी झलक देखते वक्त दर्शकों के मन में अब सिर्फ एक बात होगी – यह उस इंसान की आखिरी onscreen मौजूदगी है जिसने हमारी कई पीढ़ियों की यादों को सजाया।

फैंस के लिए धर्मेंद्र हमेशा क्या रहेंगे?

बहुत से लोगों के लिए धर्मेंद्र पहली crush थे, किसी के लिए आदर्श हीरो, किसी के लिए दोस्त जैसे इंसान, तो किसी के लिए अपने पिता या बड़े भाई की तरह एक साया। उनकी सबसे बड़ी legacy शायद यही है कि उन्होंने hero होने का मतलब सिर्फ six‑pack और stunts तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इंसानी warmth, humour और भावनाओं को भी उतनी ही importance दी।

उनके जाने के बाद भी TV पर जब भी ‘शोले’ चलेगी, वीरू की मस्तियां, बसंती के लिए की गई शरारतें, ‘ये दोस्ती…’ की chemistry और पानी की टंकी पर चढ़ा हुआ वो emotional drama हमें हंसाएगा, रुलाएगा और यह याद दिलाएगा कि असली स्टार वही होता है जो परदे से उतर कर हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन जाए। धर्मेंद्र शायद चले गए, लेकिन उनके डायलॉग, मुस्कान और फिल्मों के ज़रिए उनका ‘ही‑मैन’ दिल हमेशा जिंदा रहेगा।