Phase-4 का फोकस: कनेक्टिविटी की अगली छलांग
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के Phase-4 में 1 लाख किमी नई और अपग्रेडेड ऑल-वेदर ग्रामीण सड़कों का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी प्राथमिकता गाँवों को ब्लॉक/जिला मुख्यालय, मंडी, PHC और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों से जोड़ना है। इस चरण में कच्चे मार्गों को पक्का करना ही नहीं, पुराने नैरो पैवमेंट को चौड़ा करना, ब्लैकस्पॉट सुधार और सुरक्षित ड्रेनेज भी एजेंडा का हिस्सा हैं।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ
- आकांक्षी ज़िले: शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार पहुँच कमज़ोर वाले ज़िलों में प्राथमिकता के साथ पैकेजिंग।
- कृषि-प्रधान क्लस्टर: फल-सब्ज़ी, दुग्ध और मत्स्य क्लस्टर को मंडियों और प्रोसेसिंग यूनिट्स से सीधा जोड़।
- सीमा और जनजातीय क्षेत्र: कठिन भूभाग में ऑल-वेदर कनेक्टिविटी, ताकि सालभर आवश्यक सेवाएं पहुँचें।
मानक: ऑल-वेदर और सेफ्टी-फर्स्ट
- ऑल-वेदर स्पेसिफिकेशन: पर्याप्त क्रॉस-ड्रेनज, पक्का शोल्डर/साइड-ड्रेन्स, और फ्लड-रेजिस्टेंट डिजाइन।
- सेफ्टी फीचर्स: स्पीड कैल्मिंग, साइनएज, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव मार्किंग, ब्लैकस्पॉट ट्रीटमेंट, और स्कूल/आंगनवाड़ी के पास ट्रैफिक-कैल्मिंग।
- ग्रीन रोड्स: प्लास्टिक वेस्ट मॉडिफाइड बिटुमेन, C&D वेस्ट और कोल्ड मिक्स टेक्नोलॉजी का प्रोत्साहन।
फंडिंग मॉडल: केंद्र-राज्य साझेदारी
Phase-4 में लागत-साझेदारी केंद्र और राज्यों के बीच तय शेयर अनुपात पर होगी, जबकि DPR से लेकर साइट सुपरविजन तक की जिम्मेदारी राज्य के PWD/रूरल वर्क्स डिपार्टमेंट संभालेंगे। मेंटेनेंस के लिए पांच-वर्षीय डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के साथ परफॉर्मेंस-बेस्ड M&R (Maintenance & Repairs) अनुबंधों को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रोजेक्ट चयन: कहाँ और किस तरह
- कोर नेटवर्क लिंक: गाँव–ब्लॉक/जिला HQ, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सेकेंडरी/हायर सेकेंडरी स्कूल, और एग्री-मार्केट्स के बीच मिसिंग लिंक को प्राथमिकता।
- इंटीग्रेशन: PMGSY लिंक को स्टेट हाइवे/मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग से इंटरफेस करना ताकि लॉजिस्टिक्स सुगम हो।
- समाधान आधारित डिजाइन: हिल/फ्लड/ब्लैक कॉटन सॉइल एरिया में साइट-विशिष्ट पेवमेंट और ड्रेनेज ट्रीटमेंट।
समयसीमा और पैकेजिंग
लक्ष्य 24–36 महीनों में बड़े पैमाने पर पैकेजिंग, टेंडरिंग और निर्माण पूरा करने का है, ताकि मौसमी बाधाओं (मानसून/शीत) के बीच निर्माण विंडो का अधिकतम उपयोग हो सके। पैकेजों को ब्लॉक या क्लस्टर स्तर पर समेकित करके प्रतिस्पर्धी बोली सुनिश्चित की जाएगी और छोटे ठेकेदारों की भागीदारी के लिए MSME-अनुकूल शर्तें जोड़ी जाएंगी।
टेक-सक्षम मॉनिटरिंग
- जियोटैग फोटो: फाउंडेशन से फाइनल वेयरिंग कोर्स तक हर स्टेज का जियोटैग्ड रिकॉर्ड।
- GIS डैशबोर्ड: रियल-टाइम प्रोग्रेस, मौसम जोखिम अलर्ट और सप्लाई-चेन ट्रैकिंग।
- ड्रोन्स/उपग्रह इमेजरी: रिमोट वेरिफिकेशन और क्वालिटी ऑडिट के लिए पायलट्स का विस्तार।
गुणवत्ता नियंत्रण: तीन-स्तरीय निरीक्षण
- ठेकेदार/PIU स्तर: मटेरियल टेस्टिंग (बिटुमेन, एग्रीगेट, डेंसिटी, ग्रेडेशन) और साइट लेब रिकॉर्ड।
- राज्य गुणवत्ता मॉनिटर: सैंपलिंग, लेयर-वाइज चेक और डिफेक्ट नोटिस के साथ समयबद्ध सुधार।
- राष्ट्रीय गुणवत्ता मॉनिटर: रैंडम ऑडिट, अनुपालन रिपोर्ट और पेमेंट लिंक्ड-परफॉर्मेंस।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
- कृषि से आय: परिवहन खर्च घटने और फसल का नुकसान कम होने से नेट रियलाइजेशन बढ़ेगा।
- रोजगार: निर्माण चरण में मजदूरी अवसर और बाद में छोटे लॉजिस्टिक्स/सेवा व्यवसाय का विस्तार।
- सामाजिक लाभ: स्कूल, पीएचसी और सरकारी सेवाओं तक समय पर पहुँच; इमरजेंसी प्रतिक्रिया तेज।
मौसम और भू-जोखिम का प्रबंधन
- फ्लड-प्रोन एरिया: उन्नत एम्बैंकमेंट, बॉक्स कल्वर्ट्स और साइड-ड्रेन्स की नियमित डीसिल्टिंग।
- हिल एरिया: रिटेनिंग/ब्रेस्ट वॉल्स, रॉक बोल्टिंग, और बायो-इंजीनियरिंग से स्लोप स्टेबिलिटी।
- ब्लैक कॉटन सॉइल: सब-बेस में ड्रेनेज लेयर, लाइनिंग और मॉडिफाइड बाइंडर्स से क्रैकिंग कंट्रोल।
टेंडरिंग और पारदर्शिता
ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल्स पर स्टैंडर्ड बिड डॉक्यूमेंट्स, बिड-ओपनिंग लाइव लॉग्स, और पोस्ट-अवार्ड माइलस्टोन्स सार्वजनिक होंगे। भुगतान चरणों को मापने के लिए जियोटैग्ड प्रूफ अनिवार्य होगा और विलंब पर पेनल्टी क्लॉज़ लागू किया जाएगा।
समुदाय की भूमिका: शिकायत से समाधान तक
- सोशल ऑडिट: ग्राम सभा में प्रगति और गुणवत्ता पर सामुदायिक समीक्षा।
- ग्रिवेंस पोर्टल/हेल्पलाइन: गड्ढे, जलभराव, अधूरे वर्क पर त्वरित शिकायत और ट्रैकिंग।
- मेंटेनेंस वार्डन: पंचायत स्तर पर रोड-सेफ्टी वॉलंटियर्स और रिपोर्टिंग प्रोटोकॉल।
लाभार्थी क्या करें—एक त्वरित चेकलिस्ट
- अपने ब्लॉक में प्रस्तावित रूट की सूची ग्राम पंचायत से लें और प्राथमिकता सुझाव दें।
- स्कूल/PHC/मंडी जैसी आवश्यक जगहों तक सबसे छोटा और सुरक्षित रूट चिन्हित कर प्रस्ताव पर हस्ताक्षर जुटाएँ।
- निर्माण के दौरान अतिक्रमण/मलबा हटाने में सहयोग करें और बारिश से पहले ड्रेनेज साफ रखें।
राज्यों के लिए इम्प्लीमेंटेशन टिप्स
- DPR में हाइड्रोलॉजी और ट्रैफिक ग्रोथ को यथार्थवादी मानें; जीवन-चक्र लागत के आधार पर डिजाइन चुनें।
- कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट: क्रिटिकल पाथ, क्वांटिटी सप्लाई-लॉग और प्री-मानसून पाथ-लॉस प्लान।
- मेंटेनेंस फंडिंग: परफॉर्मेंस-बेस्ड कॉन्ट्रैक्ट और पिट-फिल प्रोटोकॉल की वार्षिक कैलेंडराइजेशन।
निष्कर्ष: सड़क से ही बढ़ता है गाँव
PMGSY Phase-4 का 1 लाख किमी लक्ष्य सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि गाँवों की आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुँच का नेटवर्क है। गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और मौसम-प्रतिरोधी सड़कें ग्रामीण भारत की उत्पादकता को नई रफ्तार देंगी—शर्त बस इतनी है कि योजना, निर्माण और मेंटेनेंस—तीनों चरणों में पारदर्शिता और तकनीकी अनुशासन का सख्ती से पालन हो।
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